Skip to main content
धर्म को जाने।
धर्म क्या है : धर्म वह अनुशासित जीवन क्रम है, जिसमें लौकिक उन्नति (अविद्या) तथा आध्यात्मिक परमगति (विद्या) दोनों की प्राप्ति होती है। धर्म का शाब्दिक अर्थ : धर्म एक संस्कृत शब्द है। ... इसका मतलब धर्म का अर्थ है कि जो सबको धारण किए हुए है अर्थात धारयति- इति धर्म:!। अर्थात जो सबको संभाले हुए है।धर्म का सन्देश क्या है : संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विभिन्न धर्मों का सद्भावना सप्ताह हमें याद दिलाता है कि हमारे इतिहास में जो सबसे प्रेरणादायक व्यक्ति हुए हैं उन्होंने बार-बार सभी धर्मों के मेलजोल और भाईचारे का संदेश दिया है, इसलिए केवल तालमेल ही श्लाघ्य है ,समवाय एव साधु, क्योंकि तालमेल से ही दूसरों के द्वारा स्वीकृति, धर्म की धारणा का ज्ञान और उसके
सम्राट प्रियदर्शी इच्छा करते हैं कि सभी धर्मों के अनुयायी एक-दूसरे के सिद्धांतों को जानें और उचित सिद्धांतों की उपलब्धि करें। जो इन विशिष्ट मतों से संबद्ध हैं, उनसे कह देना चाहिए कि सम्राट प्रियदर्शी उपहारों एवं उपाधियों को उतना महत्त्व नहीं देते, जितना उन गुणों की वृद्धि को देते हैं जो सभी धर्मों के आदमियों के लिए आवश्यक हैं।
महात्मा गाँधी ने कहा, 'धर्म मनुष्य को दूसरे से अलग नहीं करता है। वह उन्हें एक साथ मिला कर रखता है।
मैं अपने सपनों के ऐसे भारत की कल्पना नहीं करता हूँ जो केवल एक ही धर्म को विकसित करे, यनि वह केवल हिन्दू या केवल मुसलमान को ही विकसित करे, बल्कि मैं चाहता हूँ कि वह पूरी तरह सहिष्णु बने जिसमें सभी धर्म एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करें।
स्वामी विवेकानंद ने कहा, 'मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूँ जिसने विश्व को सहिष्णुता और सार्वभौम स्वीकृति दोनों की शिक्षा दी है। हम न केवल सार्वभौम सहिष्णुता में विश्वास करते हैं, बल्कि हम सभी धर्मों को सच्चा मानते हैं।
मैं एक ऐसे राष्ट्र का वासी होने में गर्व का अनुभव करता हूँ जिसने धरती के सभी देशों एवं धर्मों के शरणार्थियों तथा उत्पीड़ितों को शरण दी है।
Awesome
ReplyDeleteWe need to be together forever
ReplyDeleteथैंक्स आपकी रये के लिए
Delete